Mohabbat

औकात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके,
कमबख्त इश्क में क्या गिरे, मुफ्त में नीलाम हो गए |

बाजी- ऐ- मुहब्बत में हमारी बदकिमारी तो देखो,
चारो इक्के थे हाथ में, और एक बेगम से हार गए !

सिर्फ एक ही बात सिखी इन हुस्न वालो से हमने,
हसीन जिस्की जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है |

रोए कुछ इस तरह से मेरे जिस्म से लग के वो,
ऐसा लगा की जैसे कभी बेवफा न थे वो |


तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी,
वर्ना हमको कहा तुम से शिकायत होगी,
ये तो वही बेवफा लोगो की दुनिया है,
तुम अगर भूल भी जाओ तो कौन सी नई बात होगी |

 

बरबाद कर गए वो जिंदगी प्यार के नाम से,
बेवफाई ही मिली हमे सिर्फ़ वफा के नाम से,
जख्म ही जख्म दिए उस ने दवा के नाम से,
आसमान भी रो पड़ा मेरी मोहब्बत के अंजाम से |