बूढी औरत और कौआ

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक पीपल का पेड़ था। जिसमे बहुत सारे कौए रहते थे। एक दिन सुबह के समय सभी कौए रोज़ की तरह खाने की तलाश में पेड़ से चले गए। लेकिन एक कौआ सोया रहा।

जब वह उठा तो उसने देखा की सभी कौए जा चुके थे। इसके बाद उसने अकेले ही भोजन की तलाश करने के लिए जाने की सोची।

वह पेड़ से उड़ कर पुरे गांव में खाने की तलाश करने लगा। लेकिन उसको कहीं भी भोजन नज़र नहीं आया। इसके बाद वह एक घर की छत पर बैठ गया। उसको वहाँ बहुत ही अच्छी खुश्बू आ रही थी।

उसने जिस दिशा से खुश्बू आ रही थी। उस ओर जाने लगा। उसने देखा की एक बूढी औरत घर के आँगन में बैठ कर वड़ा बना रही थी। वड़ा को देखकर कौए के मुँह में पानी आ गया। उसको बहुत भूख लगी थी।

वह वड़ा तभी खाना चाहता था। जब वह नीचे उस बूढी औरत के पास गया तो उसने देखा की बूढी औरत ने एक कौए को पहले से बांध रखा है। बूढी औरत ने उस कौए को भी यही कहाँ की अगर तुमने वड़ा चुराने की कोशिश की तो तुमको भी इसकी तरह बांध दूंगी।

कौए को समझ आ गयी की जब तक बूढी औरत वहाँ पर है तब तक वह वड़ा नहीं चुरा सकता। उसने एक तरक़ीब सोची वह उस घर के पीछे गया और बच्चों की आवाज़ में बोला दादी कहाँ हो।

इसके बाद बूढी औरत बोली आती हूँ। जैसे ही बूढी औरत वहाँ से गयी कौए ने आकर एक वड़ा चुरा लिया और अपने पेड़ पर चला गया। जब वह अपने मुँह में वड़ा दबाएँ अपने घोंसले में पहुंचा तभी एक चालाक लोमड़ी में कौए को देख लिया।

वड़े को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। उसने कौए की तारीफ करनी शुरू कर दी। वह बोला कितना अच्छा काले रंग का कौआ है। इसके पंख कितने अच्छे है। इसकी आँखे कितने अच्छी है।

अपनी तारीफ़ सुनकर कौआ बहुत खुश हुआ और सब कुछ भूल गया। इसके बाद लोमड़ी ने कहा ऐसे अच्छे कौए की आवाज़ भी जरूर अच्छी होगी। उसने कौए से कहा क्या तुम मुझको एक गाना सुनाओगे।

इसके बाद कौए ने जैसे ही अपना मुँह खोला वड़ा पेड़ से नीचे गिर गया। चालाक लोमड़ी ने वड़ा उठाया और वहाँ से चला गया।

कौए को पता चल चूका था की लोमड़ी ने उसको बेवकूफ बनाया है। उसने सोचा बूढी औरत से वड़ा चुराने की अब दूसरी तरक़ीब लगानी पड़ेगी।

सीख : 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें झूठी तारीफ़ करने वालो से बचना चाहिए।