साहस की कहानी

अरावली के पहाड़ों के बीच एक सुंदर गांव बसा हुआ है , वहां लोग अपने मेहनत के द्वारा ही अन्न की उपज करके अपना जीवन निर्वाह करते हैं।  पशु-पालन और कृषि उनके जीवन का अभिन्न अंग है। वह मनोरंजन के लिए ताश खेलते हैं , मुर्गियों का युद्ध कराते हैं , और महिलाएं टोकरी बनाना , जुड़ा बनाना , आदि छोटे – मोटे लघु उद्योग का कार्य करती है। गांव के बाहर एक कच्चा कुआं है , रात के अंधेरे में वहां कोई भी नहीं जाता क्योंकि उस कुएं के बारे में कई सारी कहानियां लोगों ने सुन चुकी थी।

कुछ लोग कहते हैं उस गांव के कुएं के पास बहुत सारे भूत रात को पानी पीने आते हैं।

कुछ लोग बताते हैं कि एक दिन राहगीर उस कुएं में गिरकर मर गया था और उसकी आत्मा अब वही भटकती रहती है , और कोई जाता है तो उसे मार डालती है।  न जाने कितनी ही कथाएं उस कुएं को लेकर बनाई गई थी।

किंतु कोई भी व्यक्ति शाम के बाद उस रास्ते नहीं जाता , और ना ही उस कुएं के पास।

 

एक दिन की बात है


गांव में लोग आपस में उस कुएं को लेकर बात कर रहे थे , उसमें एक लोहार भी शामिल था। उसने सभी की बातों को काटते हुए कहा कि भूत नहीं होता और मैं भूत को नहीं मानता हूं। लोग उसे डांटने लगे और उसे भूत होने का यकीन दिलाने लगे। किंतु लोहार डट कर उनका सामना करने लगा और कहने लगा के भूत नहीं होता मैं उस कुएं के पास जाकर सबको साबित करुंगा।

लोहार रात को उस कुएं के पास जाने के लिए तैयार हुआ , उसने अपने हाथ एक कुल्हाड़ी भी ले ली। वह कुएं की और चल पड़ा , रात बीत गई लेकिन लोहार कभी नहीं आया। सवेरे उसका मृत शरीर कुएं में मिला , इसके बाद से भूत का डर पूरे गांव में लहर की तरह दौड़ गया। गांव के बच्चे अब शाम होते ही डर के मारे अपने माता – पिता के पास पहुंच जाते। एक समय की बात है , एक फौजी अपने घर छुट्टी पर आया हुआ था। वह अपने बेटे को कहने लगा कि गांव के बाहर एक उनका मित्र रहता है उनके वहां जाकर एक टोकरी ले आओ , सुबह हमें खेती के लिए जाना है।

इस पर फौजी का बेटा अमृत डर से वहां जाने के लिए मना कर दिया।

फौजी ने उसके डर का कारण जाना तो समझ में आया कि गांव में भूतों का भय है , जिसके कारण पूरा गांव रात के अंधेरे में बाहर ही नहीं निकलता। इस डर को अपने बेटे के जेहन से दूर करने के लिए फौजी ने ठान लिया , क्योंकि वह फौजी का बेटा था , और फौजी के सामने डर नाम की कोई चीज नहीं होती। फौजी ने एक टोर्च लिया और अपने बेटे के साथ टहलने के लिए बाहर निकल गया , अमृत डरते – डरते अपने पिता के पीछे हाथ पकड़ कर चलता रहा।

फौजी अपने बेटे को लेकर उसी कुएं के पास पहुंच गया , जहां की कहानियां सभी लोग सुनाया करते थे। फौजी ने चारों तरफ टॉर्च मार कर देखा वहां पर कोई नहीं था , अमृत को उसने बोला देखो यहां कोई है ? लोग यूं ही डरते हैं , और बच्चों को भी डर आते हैं। किंतु दूसरे क्षण कुएं में से किसी के तेजी  से चढ़ने – उतरने की आवाज सुनाई दी , इस पर फौजी ने कुएं में टॉर्च मारकर देखा और अमृत को दिखाया देखो कुछ नहीं इसमें ढेर सारी पक्षियां है जो हमारे यहां मौजूद होने के कारण वह सतर्क हो रहे हैं।

अब धीरे-धीरे अमृत का भय टूटने लगा और उसने अपने पिता का हाथ छोड़ दिया।

अमृत निडर होकर वहां घूमने लगा , उस दिन के बाद अमृत निडर हो गया था।

वह रात को भी उस कुएं के पास चला जाया करता था। धीरे-धीरे उसके गांव से उस भूत के भय का भी अंत हो गया . लोगों के सामने अब भूत कि केवल कहानियां ही थी।

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