जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे

जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे,
वही लोग अपनी मंजिल को पाने वाले होंगे।


मेरे हाथों की लकीरों के इज़ाफ़े हैं गवाह,
मैने पत्थर की तरह खुद को तराशा है बहुत।

सफ़र में मुश्किलें आयें तो जुर्रत और बढ़ती है,
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है।

 

हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब,
इसी का नाम है ज़िन्दगी चलते रहिये जनाब।

हौसलों पर अपने जो ऐतबार करते हैं उन्हें,
मंज़िलें खुद पते बताती हैं रास्ते इंतज़ार करते हैं।

ज़िंदगी ने सबकुछ लेकर इक यही बात सिखाई है,
खाली जेबों में अक्सर हौसले खनकते हैं।


उसी को हम जहाँ में रहरवे-कामिल समझते हैं,
जो हस्ती को सफर और कब्र को मंजिल समझते हैं।

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