कलाम कुदरत के हाथ है

फ़िक्र मत कर बन्दे कलम कुदरत के हाथ है,
लिखने वाले ने लिख दिया किस्मत तेरे साथ है,

फ़िक्र करता है क्यों, से होता है क्या,
रख भगवान पे भरोसा देख फिर होता है क्या।

 

डर मुझे भी लगा फासला देख कर,
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर,

खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई,
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर।

मैं मौसम नही हूँ जो पल में बदल जाऊँ,
मैं इस जमीन से दूर कहीं और ही निकल जाऊँ,

मैं उस पुराने जमाने का सिक्का हूँ मुझे फेंक न देना,
हो सकता है बुरे दिनों में मैं ही चल जाऊँ।

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