तपस्विनी की स्वदेश निष्ठा

पेशवा नारायणराव की पुत्री सुनंदा ने अपनी बुआ रानी लक्ष्मीबाई की तरह अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती देकर निर्भीकता का परिचय दिया। सुनंदा को अंग्रेजों ने त्रिचनापल्ली की जेल में बंद कर दिया ।

 

साहस की कहानी

अरावली के पहाड़ों के बीच एक सुंदर गांव बसा हुआ है , वहां लोग अपने मेहनत के द्वारा ही अन्न की उपज करके अपना जीवन निर्वाह करते हैं।  पशु-पालन और कृषि उनके जीवन का अभिन्न अंग है। वह मनोरंजन के लिए ताश खेलते हैं , मुर्गियों का युद्ध कराते हैं , और महिलाएं टोकरी बनाना , जुड़ा बनाना , आदि छोटे – मोटे लघु उद्योग का कार्य करती है। गांव के बा

भगवान का वरदान क्यों बना अभिशाप

मोहन स्वभाव का बड़ा भोला था, वह अपने आसपास जब भी गरीबी और लोगों की तकलीफ को देखता तो बहुत दुखी होता। उसने कहानियों में तो सुना था तपस्या से प्रसन्न होकर ईश्वर वरदान देते हैं, क्यों ना मैं भगवान से कुछ वरदान प्राप्त करूं और दीन दुखियों की सेवा करूं।

ऐसा विचार कर मोहन पहाड़ों पर चला गया। जहां बेहद सघन वन थे, धूप कभी कभी जमीन को छुपाती थ

खुदा के गुलाम

इब्राहिम बल्ख के बादशाह थे। सांसारिक विषय- भोगों से ऊबकर वे फकीरों का सत्संग करने लगे। बियाबान जंगल में बैठकर उन्होंने साधना की । एक दिन उन्हें किसी फरिश्ते की आवाज सुनाई दी, ‘मौत आकर तुझे झकझोरे, इससे पहले ही जाग जा ।

 

नाम की अनूठी महत्ता

गुरु नानकदेवजी एक बार किसी तीर्थस्थल पर गए हुए थे। अनेक व्यक्ति उनके सत्संग के लिए वहाँ जुट गए । एक व्यक्ति ने हाथ जोड़कर प्रश्न किया, ‘बाबा, मुझ जैसे साधारण गृहस्थ के कल्याण का सरल उपाय बताएँ । ‘

 

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